मेरठ, फरवरी 25 -- हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत मंदिर के मुख्य जिनालय में चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 17वें दिन मंगलवार को सर्वप्रथम मंगलाष्टक सकलीकरण के पश्चात मंत्रोच्चारणपूर्वक भगवान आदिनाथ के अभिषेक के साथ शांतिधारा की गई। 136 परिवारों ने विधान में शामिल होकर पुण्य का अर्जन किया। भगवान आदिनाथ का स्वर्ण कलश से अभिषेक आकाश जैन एवं शांतिधारा प्रफुल्ल जैन ने की। दीप प्रज्ज्वलित रूपा जैन ने किया। विधान के मध्य मुनि भाव भूषण जी महाराज ने कहा कि सूर्य तो प्रतिदिन उदय और अस्त हो जाता है परंतु आपका ज्ञान सदा ही चमकता रहता है। सूर्य को तो ग्रहण भी लग जाता है और वह तो बादलों में भी छिप जाता है। सूर्य का प्रकाश सीमित क्षेत्र को ही प्रकाशित कर सकता है, किंतु आपका केवल ज्ञान रूपी सूर्य तो संपूर्ण जगत को एक साथ बिना किसी बाधा के प्रकाशित करत...
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