जमशेदपुर, फरवरी 28 -- जमशेदपुर। आनन्दमार्ग प्रचारक संघ द्वारा आयोजित द्वितीय संभागीय सेमिनार में आनन्दमार्ग के वरिष्ठ आचार्य सिद्धविद्यानंद अवधूत ने "साधना" विषय पर प्रकाश डालते हुए साधना मार्ग के तीन विशेष स्तरों या क्रमों की बात कही। ये स्तर हैं - शाक्त, वैष्णव और शैव।तीनों का पारमार्थिक मूल्य समान है। अर्थात किसी व्यक्ति को समर्थ रूप से देखकर यदि कोई आनन्दमार्ग को जानना या समझना चाहे तो उनमें से कोई भी स्तर असमर्थ नहीं होगा। शाक्त साधना में ही जैव भाव से शिव भाव के पथ पर पदयात्रा शुरू करनी होती है। इस पदयात्रा में पथिक की अग्रगति मुख्यतः प्रत्याहार योग में सिद्ध होती है। प्रत्याहार योग के माध्यम से साधक जगत सेवा शुरू करता है।वैष्णव स्तर में निःस्वार्थ भक्ति का उदय होता है और शैव स्तर ब्रह्मस्वरूपता का भाव है। इस प्रकार शाक्त स्तर भोग औ...