वाराणसी, सितम्बर 4 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। बीएचयू के संस्कृत विभाग और आनंद मार्ग प्रचारक संघ की बौद्धिक शाखा 'रिनैसां यूनिवर्सल' की तरफ से गुरुवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। इसका विषय 'आनंद सूत्रम् के तुलनात्मक अध्ययन के आलोक में भारतीय ज्ञान परंपरा में आनंदमूर्ति का योगदान' था। रिनैसां यूनिवर्सल के केंद्रीय सचिव आचार्य दिव्यचेतनानंद अवधूत ने कहा कि आनंद मार्ग का दर्शन अद्वैतवाद, द्वैतवाद और पुनः अद्वैतवाद का एकीकृत दार्शनिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। उन्होंने अन्य भारतीय दर्शन प्रणालियों की तुलना में 'आनंद सूत्रम्' की दार्शनिक अवधारणाओं को रेखांकित किया। आनंद सूत्रम् के प्रथम सूत्र 'शिवशक्त्यात्मकं ब्रह्म' की व्याख्या अग्नि, दूध और कागज के टुकड़ों के उदाहरणों से की। इसके बाद मन की अवधारणा को स्पष्ट किया।

संगोष्ठी के प्रमुख वक्ता ...