आनंद कानन के कला गुरुओं ने ग्रहण किया दायित्व
वाराणसी, जून 1 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। काशी, यहां सामान्य भक्त उदात्त शिखर शिव को सहज चुनौती देता है। शिव और काशीवासी एक परिवार के सदस्य हैं। कहीं शिव अभिभावक तो कहीं अबोध हैं। पार्वती किसी की मां हैं तो किसी की भयौ। गुरु की खोज में यहां आकर राजरानी मीरा रविदास को चुनती हैं। काशी में गंगा, उत्तरवाहिनी होकर सिर्फ बहती नहीं, कठौती में भी रहती हैं। सर्वकालिक काशी की इन्हीं विशिष्टताओं के समयानुकूल परिमार्जन का केंद्र आनंद कानन गुरुकुल है। यह भी पढ़ें- गुदई महाराज को अर्पित की संगीतांजलिगुरुकुल का उद्घाटन ललित कलाओं के माध्यम से सांस्कृतिक और सांस्कारिक समृद्धि को समर्पित गुरुकुल में सात कला गुरुओं को रविवार को दायित्व ग्रहण कराया गया। सात की संख्या सप्तर्षि से प्रेरित है। सुबह-ए-बनारस आनंद कानन की ओर से नगवा के रविदास पार्क में संचालित ...
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