जमशेदपुर, मार्च 13 -- बिष्टूपुर स्थित सत्यनारायण श्याम मारवाड़ी मंदिर में शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन गुरुवार को कथावाचक स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज ने सती चरित्र, पार्वती जन्म, शिव विवाह उत्सव कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आज की यह कथा प्रेम, तपस्या और भक्ति का प्रतीक है। सच्चा प्रेम और दृढ़ संकल्प किसी भी बाधा को पार कर सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है। भक्ति में दिखावा नहीं होना चाहिए। शिव और पार्वती का मिलन केवल एक विवाह नहीं था, बल्कि यह एकीकरण था शक्ति (पार्वती) और चेतना (शिव) का, जो सृष्टि के संतुलन के लिए आवश्यक था। शिव-पार्वती विवाह का सचित्र प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि विवाह संस्कार पवित्र संस्कार है, लेकिन आधुनिक समय में प्राणी संस्कारों से दूर भाग रहा है। जीवों के बिना शरीर निरर्थक होता है। ऐसे...