हापुड़, अगस्त 4 -- आधुनिकता में कांवड़ का स्वरूप बदल गया है। पूर्व के समय में चलने वाली कांच की गंगाजली का स्थान अब बड़े बड़े क्लश ने ले लिया है। कांवड़ यात्रा में कुछ वर्षों से प्रतिस्पर्धा में क्षमता से अधिक गंगाजल उठाने के प्रचलन से न केवल संत महंत बल्कि आमजन भी चिंतित हैं। हाल यह है कि कुछ युवा एक-दूसरे की होड़ में और शारीरिक बल दिखाने के चक्कर में 100 से 200 लीटर तक गंगाजल कंधों पर उठाकर ले जा रहे हैं। जिससे हालांकि संत-महंतों का कहना है कि महादेव एक बूंद या एक लोटा जल से भी प्रसन्न होते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि क्षमता से अधिक भार उठाकर ही उनको प्रसन्न किया जा सकता है। यह भी पढ़ें- हर-हर बम-बम के जयघोष के बीच मंजिल की ओर बढ़ रहे कांवड़िएकांवड़ यात्रा और शिव भक्तों का आगमन गंगा नगरी से फाल्गुन और सावन माह में शिव भक्तों का आगमन होता ...