सोनभद्र, मार्च 3 -- दुद्धी, हिन्दुस्तान संवाद। आधुनिकता ने त्यौहारों की पुरानी परम्परा को काफी पीछे छोड़ दिया हैं। होली गायन की परंपरा अब धीरे-धीरे विलुप्त होने के कगार पर है। इसका प्रमुख कारण बदलता साामजिक परिवेश और हाईटेक हो रहे लोगों को माना जा रहा है। विविध प्रतियोगिताओं के माध्यम से इन परंपराओं को बचाने की पहल करने की जरूरत है। होली पर्व पर पहले बसंत पंचमी से ही ढोल मजीरा एवं मानर बजना शुरू हो जाया करता था। बड़ी संख्या में लोग फाग गीत गाने जुटा करते थे। चारों ओर फाग गवैयों का मस्ती भरा शोर पारंपरिक लोकगीत के माध्यम से त्योहार के उत्साह को दोगुना कर देता था। अब समय के साथ फाग गीतों की परंपरा ही विलुप्त होती जा रही है। वर्तमान समय मे हुड़दंग, अश्लीलता और नशे ने अपनी जगह बना ली है। लोक परंपरा और त्योहारों को संजोने का उत्तरदायित्व हम सभी क...
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