नई दिल्ली, अप्रैल 30 -- पुष्कर सिंह धामी,मुख्यमंत्री, उत्तराखंड आजाद भारत के इतिहास में 17 अप्रैल, 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में लिखी जानी थी, क्योंकि उस दिन हम 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में संशोधनों के माध्यम से एक युगांतकारी परिवर्तन के साक्षी बनने जा रहे थे। यह एक वैधानिक दस्तावेज से अधिक भारत की नियति बदलने वाला महा-संकल्प था, पर पीड़ा का विषय है कि महिला सशक्तीकरण का यह ऐतिहासिक प्रस्ताव कांग्रेस और उसके सहयोगियों की संकीर्ण राजनीति के चलते अपेक्षित समर्थन के अभाव में दम तोड़ गया। यह कितनी बड़ी विडंबना है कि रवांडा (विश्व में सर्वाधिक 61.3 प्रतिशत), क्यूबा (55.7 फीसदी) और मैक्सिको (50 प्रतिशत) जैसे देशों ने अपनी संसद में महिलाओं को 50 प्रतिशत से अधिक की भागीदारी दी है, वहीं हमारा विपक्ष आज भी 33 प्रतिशत के विचार से डरा हुआ है। विपक्ष...
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