मुंबई, मई 9 -- बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) को कड़े निर्देश देते हुए कहा है कि आधार रिकॉर्ड में तकनीकी खामियों या बायोमेट्रिक गड़बड़ियों के कारण आम नागरिकों को बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी सिस्टम की खामी की वजह से असली नागरिकों को उनके अधिकारों और सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है।हाईकोर्ट ने UIDAI की कार्यप्रणाली पर जताई चिंता जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस हितेन एस. वेणेगांवकर की खंडपीठ ने 6 मई को पारित एक आदेश में UIDAI की कार्यप्रणाली की आलोचना की। कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि आधार से जुड़ी तकनीकी खामियों के कारण नागरिकों को बार-बार अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ ने अपने आदेश में कहा कि आधार डेटाबेस की सत्यता बनाए ...