जमशेदपुर, मार्च 23 -- आदिवासी सेंगेल अभियान ने प्रकृति पूजक आदिवासियों के लिए सरना धर्म को संवैधानिक मान्यता देने और आगामी जनगणना में अलग धर्म कोड के रूप में शामिल करने की मांग तेज कर दी है। इन मांगों को लेकर सेंगेल की ओर से आज डीसी ऑफिस के सामने प्रदर्शन किया गया।सेंगेल के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के बावजूद आदिवासियों को अब तक अलग धर्म की पहचान नहीं मिल पाई है, जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने कहा है कि देश के करोड़ों आदिवासी प्रकृति पूजक हैं और उनकी धार्मिक परंपराएं अन्य धर्मों से भिन्न हैं, इसलिए सरना धर्म को अलग मान्यता मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने गिरिडीह स्थित मरांग बुरु (पारसनाथ पहाड़) को जैन धर्मावलंबियों से मुक्त कर आदिवासियों को सौंपने की मांग की है।...
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