रांची, अप्रैल 12 -- अनगड़ा, प्रतिनिधि। 'आदिवासी अब जागरूक हो रहे हैं और अपने धर्म को समझने लगे हैं, उनके विश्वास में भी वृद्धि हुई है।' यह बातें प्रमुख दीपा उरांव ने रविवार को राजाडेरा खिजरी टोली में आयोजित 22वें सरना झंडागड़ी स्थापना दिवस कार्यक्रम में कही। इस अवसर पर धर्म मां चारी उरांव के नेतृत्व में महिलाओं ने सरना स्थल पर जल अर्पित कर पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। विशिष्ट अतिथि समाजसेवी पारसनाथ उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का संरक्षक है। जल, जंगल और जमीन उनकी आस्था के केंद्र हैं, जिनके बिना मानव जीवन संभव नहीं है। उन्होंने प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। मौके पर सरना समिति के अध्यक्ष हिरदु उरांव, सचिव बैजनाथ उरांव, मंटू उरांव, हरखु मुंडा, भजन बेदिया, मदन बेदिया, सुनीता कच्छप, सरिता उरांव, शशि...
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