वाराणसी, नवम्बर 27 -- चौबेपुर (वाराणसी), संवाददाता। आत्मोद्धार का सर्वश्रेष्ठ साधन है भक्ति। देश काल और परिस्थितियों के कारण वर्तमान में भक्ति का स्वरूप भी बदल गया है। वर्तमान में की जा रही भक्ति अज्ञान और आडंबर से बच नहीं सकी है। वास्तव में यह जड़भक्ति है। ये बातें आचार्य स्वतंत्रदेव महाराज ने कहीं। वह चौबेपुर के उमरहां स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम में आयोजित 25 हजार कुंडीय महायज्ञ के विराम दिवस पर गुरुवार को प्रवचन कर रहे थे। देश-विदेश से जुटे भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें जड़भक्ति से उठकर भक्ति के चेतन पथ पर अग्रसर होने की जरूरत है। अधिकतर व्यक्तियों का जीवन अविद्या एवं अंधकार में व्यतीत हो रहा है। विहंगम योग ही विशुद्ध चेतन भक्ति है। इसका सहारा लेकर साधक संपूर्ण विकारों को त्याग आतंरिक शुद्ध स्वरूप की प्राप्ति कर सकता ...
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