बागपत, नवम्बर 29 -- आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमें उस वस्तु के सत्य के स्वरुप को समझना चाहिए। तभी हम सफलता प्राप्त कर सकते है। वे शुक्रवार को मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के तत्वावधान में अतिथि भवन में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बिना सत्य के स्वरुप को जाने बिना हमें असफलता ही मिलती है। चारों कषायों की निर्जरा के बाद ही हम सत्य को प्राप्त कर सकते हैं। जिसने द्रव्य, गुण, पर्याय से वस्तु को जान लिया, वहीं अपने आत्म स्वरुप को समझता है। इस कारण व्यवहार से भगवान ने सत्य के 10 स्वरुप बतायें और निश्वय से अपनी आत्मा की अनुभूति ही सत्य धर्म है। सत्य की खोज में जाते है, असत्य मिलता है, शुद्ध की चाह में अशुद्धि की प्राप्ति होती है। आचार्य सौरभ सागर ने कहा कि चाहते सब कुछ है, ...
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