आत्मस्वीकार और रात्रि भोजन त्याग का दिया संदेश
किशनगंज, अगस्त 22 -- किशनगंज। एक संवाददाता श्री दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को पूज्य मुनि श्री 108 अरिजीतसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में मंगल प्रवचन हुआ। प्रवचन में महाराज श्री ने जीवन को आत्मशुद्धि, संयम और सदाचार की ओर ले जाने वाली महत्वपूर्ण बातों पर प्रकाश डाला।
गलतियों को स्वीकार करना मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य से गलती होना स्वाभाविक है, लेकिन अपनी गलती को स्वीकार करना बहुत बड़ी बात है। व्यक्ति यदि अपनी भूल को पहचानकर उसे स्वीकार कर ले और उसे सुधारने का प्रयास करे, तो इससे बड़ी आत्मिक उपलब्धि कुछ नहीं हो सकती। गलती छिपाने के बजाय उसे स्वीकार करना व्यक्ति के चरित्र और आत्मबल को मजबूत करता है।
सच्चे परिवर्तन की शुरुआत महाराज श्री ने कहा कि सच्चा परिवर्तन वहीं से शुरू होता है, जहाँ मनुष्य अपनी कमियों को स्वीकार कर उन्हें सुधारने ...
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