शामली, मई 26 -- शामली। शहर के दिगम्बर जैन धर्मशाला में आयोजित धर्मसभा में वाक्केसरी श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए आत्मचिंतन, सत्कर्म और संयमित जीवन का महत्व बताया। मुनिराज ने कहा कि मनुष्य का वास्तविक स्वरूप उसकी आत्मा का शुद्ध स्वरूप है, जो उसे जीवन के सत्य और वास्तविक उद्देश्य से जोड़ता है। आत्मिक कल्याण की प्राप्ति सहज नहीं होती, इसके लिए निरंतर साधना, ध्यान और गुरुजनों के उपदेशों का अनुसरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से पूर्ण ज्ञान लेकर नहीं आता, बल्कि निरंतर अभ्यास और प्रयास से ही अपने लक्ष्य तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति जीवन में सुख चाहता है और दुःख से दूर रहना चाहता है, लेकिन कई बार मनुष्य पाप कर्मों में लिप्त रहकर भी पुण्य फल की इच्छा करता है। यह भी पढ़ें- जिस ...