शामली, मई 30 -- शामली। शहर के जैन धर्मशाला में आयोजित धर्मसभा में प्रवचन करते हुए आचार्य 108 विनिश्चय सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ और मूल्यवान है, लेकिन अधिकांश लोग इसे केवल सांसारिक योजनाओं और भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति में व्यतीत कर देते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जीवन भर भविष्य की योजनाएं बनाता रहता है, किंतु यह निश्चित नहीं होता कि उसे उन सभी योजनाओं को पूरा करने का अवसर प्राप्त होगा। आचार्य ने कहा कि शरीर और संसार की अनेक बातें समय के साथ भुला दी जाती हैं, लेकिन आत्मा का वास्तविक कर्तव्य स्वयं को पहचानना और अपने शुद्ध स्वरूप का अनुभव करना है। यह भी पढ़ें- Quote of the Day: विदुर नीति के अनुसार ये 6 आदतें बनती हैं पतन का कारण, समय रहते छोड़ दें, सुखमय हो जाएगा जीवन मनुष्य को विवेक, संयम और समझदारी के साथ जीवन ...