मेरठ, मई 17 -- पंचांग के अनुसार हर तीसरे वर्ष एक अधिक मास (पुरुषोत्तम मास ) पड़ता है जिसका सम्बन्ध सूर्य और पृथ्वी की गति की स्थिति में होने वाले कुछ विशेष परिवर्तन से है। पंचांग की गणनानुसार सौर वर्ष और चंद्र वर्ष की अवधि समान नहीं होती है। जहां सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है, वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का माना जाता है। इस तरह से हर वर्ष दोनों गणनाओं के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर बन जाता है, इसी अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में अधिक मास की व्यवस्था की गयी है जिससे सूर्य और चंद्र की चाल में सामंजस्य बना रहे। यह अतिरिक्त मास सामान्यतः हर तीसरे वर्ष पड़ता है। जिस चंद्र मास में सूर्य संक्रांति नहीं होती, वही अधिकमास कहलाता है। इसी कारण जिस वर्ष अधिकमास पड़ता है, उस वर्ष 12 के स्थान पर 13 महीने होते हैं और अधिक मास को ही पुरुषोत्तम...