आज महारास की रात है रात भर कौन जागेगा
नई दिल्ली, अक्टूबर 24 -- नीरजा माधव, साहित्यकार आज शरद पूर्णिमा है। पूनो की चांदनी आज धरती पर यूं बरसेगी, मानो किसी की आंखों का नेह झर रहा हो- झिर...झिर...। दूब की नोक पर टंकी ओस की बूंद की तरह झलमल, पारदर्शी। शरद पूर्णिमा की रात कौन जाग रहा है? जो जागेगा, उसे ही ज्ञान हो पाएगा। ज्ञान होगा, तो लक्ष्मी रिद्धि-सिद्धि के साथ अपनी कृपा बरसा पाएंगी। शरद पूर्णिमा की रात, यानी महारास की रात! प्रकृति और पुरुष के महामिलन की रात। जीवात्मा और परमात्मा के मिलन की रात। कृष्ण और उनकी आह्लादिनी शक्ति राधा के असीम प्रेम की रात। उस प्रेम की साक्षी बनी गोपियों के महानृत्य के स्पंदन से स्पंदित निधि वन के लता-निकुंजों से छनकर आती स्निग्ध चांदनी की रात। महारास की निशा में शेष-अशेष की कोई पहचान नहीं। यमुना का तट, कदंब की पत्तियों और लता-निकुंजों के झरोखों से छ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.