अररिया, अगस्त 15 -- अनिल झा कुर्साकांटा। ब्रिटिश हुकूमत की गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए कुर्साकांटा प्रखंड के दर्जनों युवकों ने मौत की परवाह किये बगैर स्वतंत्रता अंदोलन में कूद पड़े थे। इसके लिए लिए ये अंग्रेजी फौजों से लाठियां खाई, खून बहाया, जेल गये, यातना सही लेकिन उफ तक नहीं बोले। इन रणबाकुरों में से एक को तो बिटिश फोजों ने मार कर न केवल उनकी हड्डी तोड़ दी बल्कि पांच वर्ष नौ माह 19 दिन भागलपुर के सेंट्रल जेल में बंद कर दिया। उफ के बदले बोलते रहे भारत माता की जाय। ऐसे जाबांज थे- कुर्साकांटा प्रखंड के कमलदाहा पंचायत के बखरी निवासी कमलानन्द विश्वास। लेकिन दुखद पहलू ये कि आजादी के इस दीवाने के परिवार आज फटेहाल जीवन जीने को विवश हैं। इसके परिवार में आज विधवा पोतुहू, एक पौत्र व एक पौत्री हीं है। स्वतंत्रता सेनानी के परिजन को किसी प्रकार की ...