नई दिल्ली, अप्रैल 9 -- Sabarimala Case: सुप्रीम कोर्ट में शबरीमला मामले पर चल रही सुनवाई के दौरान पीठ ने बुधवार को कुछ बेहद अहम टिप्पणियां की हैं। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि 2006 में जिस जनहित याचिका को स्वीकार किया गया था, आज अगर वही याचिका दाखिल होती तो उसे खारिज कर दिया जाता। अदालत ने यह भी माना कि आज के समय में जनहित याचिकाओं का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल हो रहा है और कई बार इन्हें निजी एजेंडा पूरा करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि सबरीमला की परंपरा को किसी भगवान अय्यप्पा के श्रद्धालु ने चुनौती नहीं दी थी। इस पर सवाल उठाते हुए जस्टिस बी वी नागरत्ना ने कहा कि अगर आज कोई वकीलों का स...