नई दिल्ली, अक्टूबर 5 -- आज दिल्ली में रामलीला का नाम आते ही बड़े मैदान, ऊंचे रावण के पुतले, चमकदार मंच और हजारों लोगों की भीड़ याद आती है। लेकिन कुछ साल पीछे जाएं तो तस्वीर काफी अलग नजर आती है। उस समय रामलीला सिर्फ मंच पर कहानी दिखाने तक सीमित नहीं थी। इसमें शाही दरबार, सजे हुए घोड़े, मेले और कई तरह की खास रस्में भी शामिल होती थीं। अलग-अलग दौर में दिल्ली की रामलीला ने शहर के बदलते रंग भी देखे। कभी इसे बादशाह के सामने दिखाया जाता था, तो कभी सैनिक खुद राम और रावण की लड़ाई का हिस्सा बनते थे। आइए जानते हैं, समय के साथ दिल्ली की रामलीला कैसे बदलती गई।मुगल दौर में कैसी थी रामलीला? जब शाहजहां ने राजधानी आगरा से दिल्ली बदली और शाहजहानाबाद बसाया, तब दशहरा भी शाही दरबार में मनाया जाता था। उस समय रामलीला यमुना और लाल किले के बीच के खुले मैदान में हो...