आजादी के रण से शिक्षा के नवनिर्माण तक पहुंचे दुर्गा बाबू
भभुआ, अगस्त 14 -- अंग्रेजों की यातना भी नहीं डिगा सकी संकल्प, स्वतंत्र भारत के लिए शिक्षा को बनाया बदलाव का माध्यम चांद में जन्मे दुर्गा बाबू ने गांधी और टैगोर के विचारों से प्रेरित होकर 'मानव भारती' की रखी थी नींव (पेज चार) भभुआ, नगर संवाददाता। कैमूर की धरती ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस धरती ने ऐसे अनेक स्वतंत्रता सेनानियों को जन्म दिया, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए आजाद भारत का सपना देखा। इन्हीं महान विभूतियों में चांद की धरती पर जन्मे डॉ. दुर्गा प्रसाद पांडेय का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उनका जीवन संघर्ष, त्याग, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण की ऐसी कहानी है, जो आज भी नई पीढ़ी को प्रेरणा देती है। 11 फरवरी 1910 को चांद में जन्मे डॉ. दुर्गा प्रसाद पांडेय के पिता जगरनाथ ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.