कानपुर, अप्रैल 26 -- मूसानगर, संवाददाता। उत्तर प्रदेश में विकास के दावों के बीच एक ऐसा गांव भी है, जहां आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी सुविधाएं लोगों से कोसों दूर हैं। करीब 600 लोगों की आबादी वाला यह गांव हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर है। भुंडा गांव और भरतौली गांव को जोड़ने के लिए कोई पक्का रास्ता या पुल नहीं है, जिसके कारण ग्रामीणों को रोजाना खतरनाक तरीके से सेंगुर नदी पार करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती-किसानी और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए उन्हें नदी के उस पार जाना पड़ता है। फसल काटने से लेकर बाजार जाने तक हर काम के लिए नदी पार करना उनकी मजबूरी बन गई है। यह भी पढ़ें- जमुई: झाझा के केशोपुर में पुलिया के कराया गया निर्माण निरर्थक साबित हो रहा है भुंडा से भरतोली गांव जाने के लिए करीब 27 किलोमीटर घूम कर जाना...