नई दिल्ली, अप्रैल 16 -- एक उपभोक्ता अदालत ने कहा कि किसी उड़ान को रद्द करना और बाद में यह दावा करना कि इसे 'पुनर्निर्धारित' किया गया था, जबकि यात्रियों को 'न आने' के लिए दोषी ठहराना 'अनुचित व्यापार प्रथा' के बराबर है। अदालत ने अब बंद हो चुकी गो एयरलाइंस को मुआवजा देने का निर्देश दिया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पिछले महीने पारित एक आदेश में एयरलाइन (जिसे बाद में गो फर्स्ट के रूप में रीब्रांड किया गया) को एक यात्री को 63,000 रुपये वापस करने और उसे मुआवजा भी देने का निर्देश दिया। शिकायतकर्ता परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड में एक वैज्ञानिक अधिकारी हैं। यह भी पढ़ें- अंतिम समय में उड़़ान रद्द होने पर मुआवजे का आदेश उन्होंने 26 दिसंबर, 2019 को गोवा से चंडीगढ़ जाने वाली उड़ान के लिए समूह टिकट बुक किए थे। उनकी शिकायत के अनुसार, उड़ान भरने स...