बेगुसराय, फरवरी 17 -- चेरियाबरियारपुर, एक संवाददाता। ऐसे तो भगवान का जन्म ही संतों और देवताओं के संकट को हरने के लिए हुआ है लेकिन जब उन्होंने मनुज रूप लिया है तो पूरी नर लीला तो करनी ही होगी। ये बातें आकोपुर श्री भैरव स्थान परिसर में मंगलवार को अखंड नवाह रामनाम संकीर्तन के बीच नौ दिवसीय श्री राम कथा महायज्ञ के आठवें दिन मंगलवार को कथा आरंभ करते हुए गोविंदाचार्य गुप्तेश्वर जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि समय बीतता चला गया। राजा दशरथ भी बूढ़े हो रहे थे। गुरु से परामर्श लिया और अयोध्या की जनता का भी समर्थन प्राप्त था कि अब राम का राज्याभिषेक किया जाए। सबसे अधिक माता कैकेयी भी यही चाहती थी। लेकिन, भगवानों के कार्य पूरे होने वाले थे सो भगवती सरस्वती मंथरा की जिह्वा पर बैठ गईं। रानी को सिखाया कि युद्ध के दौरान राजा से मिले वरदान में अपने पुत्...
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