पीलीभीत, मार्च 23 -- एएसएमसी के आईसीयू में इलाज का तरीका बदला है। अब सिर्फ जान बचाने नहीं, बल्कि मरीजों के अधिकार, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता पर भी काम हो रहा है। पैरालिसिस के दो मरीजों के इलाज के दौरान यह पहल शुरू की गई। प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा के निर्देशन में आईसीयू में फिजियोथेरेपी जोड़ी गई और दिव्यांग अधिकारों पर जागरूकता बढ़ाई गई। आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम ने बताया कि अब दिव्यांगता को अधिकार आधारित नजरिये से देखा जा रहा है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत श्रेणियां 7 से बढ़ाकर 21 की गई हैं। आईसीयू में भर्ती दिव्यांग मरीजों को डिस्चार्ज से पहले यूडीआईडी बनवाने में मदद दी जा रही है, जिससे उन्हें पेंशन, उपकरण, यात्रा छूट और आरक्षण का लाभ मिल सके।
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