वाराणसी, मार्च 15 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। आईआईटी बीएचयू में आयोजित 'भारत में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास' विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे और अंतिम दिन रविवार को स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों, पारंपरिक आजीविकाओं तथा सांस्कृतिक विरासत और सतत विकास से जुड़े नीतिगत आयामों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम की शुरुआत आईआईटी खड़गपुर के प्रो.भगिरथ बेहेरा के प्लेनरी व्याख्यान से हुई।प्रो.बोहरा ने परंपरागत खाद्य प्रणालियों में भोजन और पारिस्थितिकी के प्रति गहरे सम्मान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्थानीय खाद्य प्रणालियां और पाक परंपराएं सतत जीवनशैली और जलवायु अनुकूलन के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इसके बाद आयोजित समानांतर सत्रों में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के विविध आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। आईआईटी (बीएचयू) ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.