बरेली, अप्रैल 2 -- गुरूदेव की दिव्य ज्योति कलश यात्रा गुरुवार को आंवला पहुंची, जिसका स्वागत किया गया। जिसमें 2400 तीर्थ का जल और रज इस कलश में अभिमंत्रित है, जिसके दर्शन मात्र से 2400 तीर्थ का पुण्य प्राप्त होगा। उन परम पूज्य गुरुदेव की चेतना दिव्य अखंड ज्योति के रूप में कलश के साथ चल रही है। गुरुदेव ने 3200 से अधिक पुस्तक लिखी हैं उन्होंने गायत्री के 24 महापुरुष पुरुचरण कर कठिन तप साधना की। सभी लोगों ने दीप यज्ञ के साथ गुरुदेव के विचारों को जाना और अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। दीप यज्ञ और आरती के साथ समापन हुआ। साधना के सौ साल पूरे होने पर शांतिकुंज हरिद्वार से जून 2025 में शुरू हुई है और इसका समापन जून 2026 में हरिद्वार पहुंचकर होगा।
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