आरा, अप्रैल 15 -- धरती पुत्रों की व्यथा : -प्रकृति की मार से किसानों के टूट रहे सपने, बेचने पर नहीं मिल रही सही कीमत -जिले में सरसों की 588 हेक्टेयर, सूर्यमुखी की आठ हेक्टेयर और तीसी की 271 हेक्टेयर में खेती -सरकारी स्तर पर खरीद की मजबूत व्यवस्था नहीं, किसानों को नहीं मिल पाता उचित मूल्य -फसल उपजने पर बिचौलियों और व्यापारियों के हाथों बेचने की बन जाती है मजबूरी आरा, हमारे संवाददाता। भोजपुर जिले के धरती पुत्रों की व्यथा और दर्द इस साल प्रकृति की मार से कम होने का नाम नहीं ले रही है। खरीफ फसल से शुरू हुई त्रासदी रबी फसल तक पीछा नहीं छोड़ी। यह भी पढ़ें- पीली क्रांति पर महंगाई की मार: सरसों का दाम 500 बढ़ा तो लागत में 1200 का उछाल नतीजा हुआ कि रबी की प्रमुख फसल तेलहनी भी मारी गई। इस तरह जिले के किसान प्रकृति की दोहरी मार से बाहर नहीं निकल सके।...
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