आंखें खोने के बाद भी नहीं मानी हार, अपनी जमापूंजी से बना दिया नेत्रहीन बच्चों का मुफ्त स्कूल
लखनऊ, जून 28 -- चिंतामणि मिश्रा/अमेठी। कुछ लोग तकलीफ में टूट जाते हैं और कुछ लोग तकलीफ को अपनी ताकत बना लेते हैं। अमेठी जिले के सिंहपुर विकासखंड के फूला गांव निवासी चंद्रशेखर शुक्ला उन्हीं में से हैं। दोनों आंखें जाने के बाद जहां कोई भी टूट जाता, वहां उन्होंने उन बच्चों के लिए जीना चुना जो उनसे भी गहरे अंधेरे में थे। उनकी यह कहानी सिर्फ एक इंसान की नहीं बल्कि उस अटूट इरादे की है जो हर मुश्किल को मात दे सकता है। जब एक हादसे ने बदल दी पूरी जिंदगी
संघर्ष और समर्पण चंद्रशेखर शुक्ला तिलोई स्थित सुभाष पशुपतिनाथ विद्यापीठ इंटर कॉलेज में जीव विज्ञान के शिक्षक थे। 1 अक्टूबर 1991 को एक सड़क दुर्घटना ने उनकी दोनों आंखों की रोशनी हमेशा के लिए छीन ली। वह पल जिंदगी का सबसे भारी पल रहा होगा जब आंखें बंद हुईं और दुनिया हमेशा के लिए अंधेरी हो गई। जो इंसा...
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