अहिंसा ही हमारी संस्कृति का केंद्र : भाव भूषण
मेरठ, जून 5 -- श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे श्री शांतिनाथ महामंडल विधान में मुख्य वेदी पर विराजमान त्रय तीर्थंकरों का जलाभिषेक किया गया। तत्पश्चात् शांतिधारा नरेश चंद जैन, उर्मिला जैन, पार्श्व जैन आदि ने की। श्री शांतिनाथ विधान के 16वें दिन आचार्य भाव भूषण महाराज ने धर्मसभा में जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा पर प्रवचन करते हुए कहा कि अहिंसा प्रत्येक आत्मा का धर्म है। विश्व के प्रत्येक प्राणी में अहिंसक भाव स्वयं ही सिद्ध है। हमारा देश आदिकाल से ही अहिंसात्मक संस्कृति का केंद्र रहा है। यह ऋषि मुनियों की भूमि है। परंतु आज देश में पाश्चात्य संस्कृति को अपनाया जा रहा है और व्यक्ति मांसाहार की ओर बढ़ रहा हैं। यह भी पढ़ें- जीवों की रक्षा ही धर्म है : भाव भूषण जिससे हिंसा और झूठ पनप रहा है। यदि हमें संसार क...
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