रांची, मार्च 31 -- रांची, वरीय संवाददाता। रांची में विराजमान दिगम्बर जैनाचार्य मुनिश्री 108 प्रमाण सागर ने मंगलवार सुबह प्रवचन में आत्मशुद्धि, अहिंसा और संयम को जीवन का जरूरी आधार बताया। विशाल संख्या में जुटे श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य का उत्थान बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की निर्मलता से होता है। मुनिश्री ने कहा कि अहिंसा केवल एक व्यवहार नहीं, बल्कि जीने का दृष्टिकोण है। जब मनुष्य के भीतर कटुता, ईर्ष्या और राग-द्वेष समाप्त होते हैं। तभी उसके जीवन में शांति और स्थिरता का उदय होता है। उन्होंने सत्य, करुणा और अपरिग्रह को जीवन की बुनियादी आवश्यकता बताते हुए कहा कि इन सिद्धांतों के पालन से समाज में सौहार्द और सद्भाव बढ़ता है। आगामी पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का उल्लेख करते हुए मुनिश्री ने कहा क...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.