कौशाम्बी, मार्च 1 -- हिमांशु भट्ट। ऐतिहासिक महत्वों से सराबोर सरायअकिल नगर की होली का अतीत भी काफी स्वर्णिम है। मां रत्नावली की नगरी का यह पहला ऐसा नगर है, जहां सात दिनों तक रंग-गुलाल उड़ाए जाते हैं। थाने का त्योहार रजिस्टर देखें तो पता चलता है कि परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है। हालांकि, आधुनिकता के इस युग ने परंपरा में कई स्तर पर फेरबदल भी किए हैं। सरायअकिल में होली ब्रिटिश काल से ही सात दिनों तक खेली जा रही है। पहले सातों दिन अलग-अलग रंगों से होली खेली जाती थी। कभी लाल तो कभी नीला, पीला या अन्य रंग इस्तेमाल किया जाता था। हर दिन अलग मोहल्ले में होली होती थी। जिस मोहल्ले में होली होती थी, वहां उसी बिरादरी के लोग रंग-गुलाल उड़ाते थे, जिसकी संख्या बहुतायत होती थी। हालांकि, बाकियों के लिए कोई मनाही नहीं थी। मसलन, हवेली की होली में रजवाड़...
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