अहंकार रूपी कंस का अंत सुनिश्चित-वत्सल महराज
मिर्जापुर, जून 20 -- जिगना, हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र के गोसीपुर गांव के हनुमान मंदिर प्रांगण में चल रही संगीतमय भागवत कथा के सातवें दिन वृंदावन से पधारे कथावाचक वत्सल महाराज ने कंस वध की कथा सुनाकर न्याय-अन्याय, सत्य-असत्य, नीति-अनीति, धर्म-अधर्म के मर्म का वर्णन किया। कृष्ण को अपने राजमहल में सामने देखकर कंस गरज पड़ा कि अच्छा हुआ तुम मेरे सामने आ गए। कृष्ण ने कहा कि मैं तो हमेशा ही तुम्हारे सामने था। बस तुम पहचान नहीं पाए।
कथा का संदेश कथावाचक ने बताया कि श्रीकृष्ण ने कंस से कहा कि खड्ग फेंककर हमारी शरण में आ जाओ, हमेशा के लिए क्षमा कर देंगे। यह सुनते ही कंस अट्टहास करने लगा कहा कि मर सकता हूँ ,झुक नहीं सकता। तब कृष्ण ने कहा कि तुम्हारे पापों का घड़ा भर चुका है। अब मृत्यु के लिए तैयार हो जाओ। कंस के आखिरी शब्द थे, किसकी मृत्यु महाबली ...
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