मुजफ्फर नगर, दिसम्बर 27 -- क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर महाराज ने सभा को चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर पीसनोपाडा में कहा कि कितना भी बड़ा उद्योगपति क्यों ना हो उसका जन्मदिन केवल जीते जी मनाया जाता है, मरने के बाद तो केवल पुण्यतिथि मनाई जाती है, वह भी मात्र कुछ सालों तक। मगर तीर्थंकर और संत अमर होते हैं। जिनके जाने के करोड़ों वर्षों बाद भी उन्हें याद किया जाता है। तीर्थंकरो के जन्म कल्याण को हर्षोल्लास पूर्वक आज भी मनाया जाता है। मुनि श्री ने आगे कहा कि हनुमान शब्द कहता है जिसने अपने अहंकार को समाप्त कर दिया, वही हनुमान होता है। आज आदमी के शरीर का वजन काम है मगर अहंकार का बजन बहुत है। जिसके कारण आदमी अपने मूल स्वरूप को भूलकर अहंकार को सीने से लगाकर घूमता है। अहंकार के कारण वह सब को मिटाना चाहता है मगर भूल जाता है कि दूसरे को नहीं वह स्वयं...