अस्मिता की पुकार या हिंदुत्व की ललकार, अबकी बार बंगाल में किसकी सरकार; क्या हैं जमीनी हालात
नई दिल्ली, अप्रैल 6 -- पश्चिम बंगाल की राजनीति के बारे में एक मशहूर कहावत है कि "जो आज बंगाल सोचता है, वो कल भारत सोचता है।" हालांकि, आज का बंगाल क्या सोच रहा है, यह समझना किसी थ्रिलर फिल्म की गुत्थी सुलझाने जैसा है। साल 2026 के विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े बंगाल में इस बार मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि 'अस्तित्व' और 'अस्मिता' का है। यहां अस्मिता का मतलब बंगाली पहचान से है जिसे ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी ने खुद के साथ जोड़ लिया है। जबकि बीजेपी के लिए यह चुनाव उसके वैचारिक अस्तित्व के विस्तार की है जिसे वह अक्सर हिंदू पहचान की रक्षा के तौर पर खुद से जोड़ती है। आइए एक नजर डालते हैं बंगाल में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की जमीनी हकीकत पर।अखाड़े में कौन किसके सामने? बंगाल के अखाड़े में मोटे तौर पर 202...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.