नई दिल्ली, सितम्बर 29 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देशभर में निजी अस्पताल मरीजों की सेवा के बजाए मुनाफा कमाने वाले उद्योगों की तरह काम करते हैं। शीर्ष अदालत ने कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की दवाओं पर मरीजों से 10 गुना अधिक कीमत वसूले जाने को 'बर्बरता' करार देते हुए कहा कि इस पर लगाम लगाने की जरूरत है। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कैंसर और दूसरी बीमारियों की दवाओं की अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी), रिटेल को मिलने वाली कीमत (पीटीआर) से 16 फीसदी तक तय करने के लिए कानून बनाने की वकालत की। पीठ ने सरकार से कहा कि एक ऐसा कानून बनाया जा सकता है, जिसके जरिए यह तय किया जा सकता है कि सभी दवाओं की कीमत एमआरपी, पीटीआर से 16 फीसदी से अधिक न हो। जस्टिस मेहता ने निजी हेल्थकेयर के व्यावसायीकरण की आलोचना करते हुए कहा कि कॉर्पोरेट अस्पत...