हरदोई, जून 11 -- हरदोई, संवाददाता। कभी पीने के पानी का मुख्य स्रोत रहे कुएं आज अपने अस्त्तिव की जंग लड़ रहे हैं। अगर इस ओर ध्यान न दिया गया तो हो सकता है कि आने वाले समय मे कुएं केवल किताबों में ही नजर आएं। बताते हैं कि पहले शहर से लेकर कस्बे और गांव के लगभग हर मोहल्ले में कुआं हुआ करता था। लोग पानी पीने,नहाने आदि के लिए कुएं के पानी का ही इस्तेमाल करते थे। कुएं और तालाब से जलस्तर भी ठीक रहता था। लेकिन बदलते परिवेश में कुओं का इस्तेमाल कम हुआ तो उनका अस्तित्व मिटने लगा। आलम यह है कि अब शादी में होने वाली कुंआबारा रस्म के लिए भी लोगों को कुंआ खोजना पड़ता है। कस्बे में अब कुछ कुएं ही बचे हैं लेकिन उनमें भी किसी मे पानी नही बचा है तो किसी में कूड़ा भरा हुआ है। जिम्मेदारो की अनदेखी से एक विरासत दम तोड़ती नजर आने लगी है। लोगों का कहना है कि जो कुए...