मधुबनी, जनवरी 22 -- मधुबनी । समय के साथ महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिट्टी से बर्तन और मूर्तियां बनाने वाले कारीगरों की आर्थिक स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। कभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की पहचान रहे मूर्तिकार आज आजीविका के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। मिट्टी, पुआल, पेंट और अन्य कच्चे सामान की कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन इसके अनुपात में मूर्तियों और मिट्टी के बर्तनों के दाम नहीं बढ़ पाए हैं। नतीजतन, कारीगरों की मेहनत का उचित मूल्य उन्हें नहीं मिल पा रहा है। मूर्तिकारों का कहना है कि उनका यह पुश्तैनी पेशा अब घाटे का सौदा बनता जा रहा है। गर्मी हो या ठंड, बारिश हो या तेज धूप-पूरे परिवार के साथ दिन-रात मेहनत कर वे मिट्टी से मूर्तियां और बर्तन तैयार करते हैं। इसके बावजूद आमदनी इतनी कम होती है कि परिवार का ग...
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