बलिया, मार्च 23 -- बलिया, संवाददाता। भारतीय नवसंवत्सर का पहला सूर्योपासना का महापर्व छठ का पहला अर्घ्य 24 मार्च यानि मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को देने के साथ ही इस कठिन व्रत का तीसरा सोपान पूर्ण होगा। अध्यात्मिक और वैज्ञानिकता से पूर्ण इस पर्व को लेकर सोमवार को बाजार में फल व प्रसाद सामग्री खरीदने लोगों की भीड़ दिखी। बिहार का सीमावर्ती जिला होने से यहां भी छठ पर्व बड़े पैमाने पर उत्साह के साथ मनाया जाता है। खासकर द्वाबा इलाके लोग साल के दोनों छठ पर्व को विधि विधान से करते हैं।सूर्यषष्ठी (छठ) व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए फेफना क्षेत्र के थम्हनपुरा निवासी आचार्य डॉ. अखिलेश उपाध्याय ने बताया कि सूर्यषष्ठी व्रत होने के कारण इसे छठ कहा जाता है, जो साल मे दो बार पहला चैत और दूसरा कार्तिक में मनाया जाता है। डॉ. उपाध्याय ने बताया कि धार्म...