प्रयागराज, अप्रैल 18 -- युवा सृजन संवाद की किताबनामा शृंखला के तहत शनिवार को अंजुमन-रूहे-अदब में पुस्तक परिचर्चा आयोजित की गई। कथाकार असरार गांधी के दूसरे कहानी संग्रह धूप-छांव पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता कर रहे प्रो. हेरम्ब चतुर्वेदी ने कहा कि कहानियों में भूमंडलीकरण के बाद मध्यम वर्गीय समाज के अन्तर्सम्बन्धों की चर्चा की गई है। इविवि के हिंदी विभाग के प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि कहानियों में शब्दों का अपव्यय नहीं दिखता। डॉ. शिशिर सोमवंशी ने कहा कि किसी रचनाकार की कहानियों की समीक्षा उसके कथानक से नहीं बल्कि उसकी रचना प्रक्रिया पर निर्भर करती है। असरार की कहानियों की बड़ी विशेषता यही है कि उनके पात्र और कहानियों के परिवेश पूरा हिन्दुस्तानी है। यह भी पढ़ें- असरार की 'रिहाई' और 'धूप छांव' देवनागरी में भी प्रकाशित उन्होंने स्...
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