नई दिल्ली, मई 4 -- चंदन कुमार शर्मा,प्रोफेसर, तेजपुर विवि, असम असम में भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक ताकत, उसके द्वारा झोंके गए अकूत संसाधन और विपक्ष की कमजोरियों को देखते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत की संभावना काफी पहले से लग रही थी। उल्टे, भाजपा की इतनी आसान जीत को देखकर पर्यवेक्षक कुछ हद तक हैरान हैं, क्योंकि निवर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा द्वारा विश्वास जताने के बावजूद, कई पर्यवेक्षक इससे कहीं कड़े मुकाबले की उम्मीद पाले बैठे थे। यह कहना गलत होगा कि मौजूदा सरकार को किसी असंतोष का सामना नहीं करना पड़ा। नागरिक समाज संगठनों ने भ्रष्टाचार, सरकारी स्कूलों को बंद किए जाने और विकास के नाम पर पर्यावरण को हो रहे नुकसान जैसे मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। फिर भी, ये चिंताएं भाजपा के आक्रामक- धुआंधार चुनाव प्र...