नई दिल्ली, जून 13 -- असम की राजधानी गुवाहाटी के पास नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर भारत के सबसे प्राचीन और शक्तिशाली शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर मां सती के योनि भाग से जुड़ा होने के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक कुंड की पूजा की जाती है। कामाख्या देवी को शक्ति की अधिष्ठात्री माना जाता है और तांत्रिक साधना के लिए यह स्थान विश्व प्रसिद्ध है।कामाख्या मंदिर का पौराणिक महत्व कालिका पुराण और अन्य शास्त्रों के अनुसार, जब माता सती ने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपमान सहकर शरीर त्याग दिया, तब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे। संसार को बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 टुकड़ों में विभक्त कर दिया। जहां-जहां ये टुकड़े गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ...