असंभव की स्थिति में आरोपी की पेशी बिना रिमांड बढ़ाना अवैध नहीं, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
प्रयागराज, मई 22 -- Allahabad Highcourt Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी अपरिहार्य परिस्थिति के कारण आरोपी को अदालत में पेश करना संभव न हो, तो केवल गैरहाजिरी के आधार पर न्यायिक रिमांड आदेश स्वतः अवैध नहीं माना जाएगा। अदालत ने 'डॉक्ट्रिन ऑफ इम्पॉसिबिलिटी' यानी असंभवता के सिद्धांत को लागू करते हुए आरोपी की याचिका खारिज कर दी। डॉ आशीष शाक्य कि याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने सुनवाई की। याचिका में 16 अप्रैल 2026 को आरोपी की न्यायिक हिरासत बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि बीएनएसएस की धारा 187(4) के तहत आरोपी की उपस्थिति अनिवार्य है और बिना पेशी के रिमांड बढ़ाना अवैध है। याचिकाकर्ता ने जिगर उर्फ जिमी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला भी दिया। वहीं राज्य सरकार की...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.