रांची, जून 30 -- रांची, वरीय संवाददाता। नगर के दिव्यदेशम् श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में श्रीधाम वृंदावन से पधारे श्रीस्वामी अनिरुद्धाचार्य के प्रवचन सुनने के लिए भक्तों की भीड़ रही। उन्होंने भक्तों को प्रवचन के माध्यम से सदुपदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का नौ द्वार और असंख्य छिद्रों वाली यह शरीर है। इसके सभी द्वारों और छिद्रों से विकार का श्राव होता है। इसे हम धोते हैं, साफ करते हैं, फिर भी कुछ समय के बाद इसमें दुर्गंध आ ही जाती है। तब भी इस पर इस शरीर पर बड़ा मोह होता है। संसार के प्रपंच में बड़ी आशक्ति होती है। यही मोह, आशक्ति और ममता यदि भगवान में हो, भगवान के नाम में हो, तो वह शरीरधारी जीव निर्मल हो जाता है। भगवान को पा लेता है। यह भी पढ़ें- सुंदरकांड के साथ पढ़ा विनय चालीसाप्रवचन का सार श्रीस्वामी अनिरुद्धाचार...