बलरामपुर, जून 17 -- बलरामपुर, संवाददाता। मानव जीवन को संतुलित, संयमित और उद्देश्यपूर्ण बनाने में अष्टांग योग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अष्टांग योग न केवल व्यक्ति की बुद्धि को परिष्कृत करता है, बल्कि उसके भीतर विवेक, आत्मचिंतन व सकारात्मक जीवन दृष्टि का विकास करता है। यह विचार देव संस्कृति विश्वविद्यालय शांतिकुंज हरिद्वार के वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. सुरेश लाल बर्नवाल ने व्यक्त किए। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय व बलरामपुर फर्स्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय योग व्याख्यानमाला के दूसरे दिन बुधवार को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अष्टांग योग की उपयोगिता विषय पर आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए प्रो. बर्नवाल ने भारतीय दर्शन की विभिन्न धाराओं और उनके मूल सिद्धांतों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। गायत्र...