लखनऊ, फरवरी 26 -- गोमती नगर एसएनए के संत गाडगे महाराज सभागार में उस समय इतिहास जीवंत हो उठा जब संस्था विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर ने ऐतिहासिक नाटक विजय पर्व का प्रभावशाली मंचन किया। सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रामकुमार वर्मा की रचना और चंद्रभाष सिंह के सशक्त निर्देशन ने प्रस्तुति को ऊंचाई प्रदान की। प्रथम अंक में सत्ता संघर्ष का तीखा स्वर दर्शकों को सीधे मौर्यकाल की राजनीतिक हलचलों में ले जाता है। अमात्य-मंडल द्वारा अशोक को उत्तराधिकारी घोषित किए जाने के साथ ही भाइयों की महत्वाकांक्षा षड्यंत्र में बदल जाती है। सोन नदी के तट पर रची गई योजना और अशोक का धैर्यपूर्ण आत्मविश्वास यह स्पष्ट कर देता है कि उनकी विजय केवल शौर्य की नहीं, बल्कि संयम और दृढ़ता की भी है। द्वितीय अंक में उज्जयिनी और पश्चिम-चक्र की राजनीति के माध्यम से सुगाम की महत्वाकां...