नई दिल्ली, मार्च 5 -- पुरुषों के अधिकारों की पैरवी करते हुए केरल हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि पुरुषों की भी अपनी गरिमा, गर्व, आत्मसम्मान और एक सामाजिक पहचान होती है। अदालत ने यह टिप्पणी एक विवाहित महिला और उसके प्रेमी को उनके रिश्ते से पैदा हुई बच्ची के जन्म प्रमाण पत्र में पिता का नाम बदलने की अनुमति देते हुए की। कोर्ट ने बच्ची के जैविक पिता (प्रेमी) का नाम, महिला के कानूनी पति के नाम की जगह दर्ज करने का आदेश दिया है।कोर्ट की बेबाक राय और पुरुषों का समर्थन जस्टिस पीवी कुन्हीकृष्णन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण व्यक्ति की दुखद कहानी बताया, जिसकी पत्नी ने शादी के अस्तित्व में रहते हुए किसी अन्य पुरुष के साथ संबंध बनाए और एक बच्ची को जन्म दिया। कोर्ट ने समाज के दोहरे रवैये पर...