बाराबंकी, मार्च 12 -- सूरतगंज (बाराबंकी)। क्षेत्र की ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर भगहर झील इन दिनों जलकुंभी की मोटी परत से ढककर अपनी पहचान खोती जा रही है। करीब 84 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली यह विशाल झील अब हरे कचरे में तब्दील होती नजर आ रही है। झील में तेजी से फैल रही जलकुंभी के कारण जहां नाव संचालन पूरी तरह ठप हो गया है, वहीं मछलियों और प्रवासी पक्षियों का भी अस्तित्व संकट में पड़ गया है। इससे आसपास के गांवों के हजारों लोग प्रभावित हो रहे हैं। विदेशी पक्षियों का भंग हो रहा मोह: पहले सर्दियों के मौसम में इस झील पर दूर-दराज देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों का डेरा रहता था। सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट और झील के ऊपर उनकी उड़ान इस क्षेत्र की पहचान बन चुकी थी। लेकिन अब जलकुंभी के कारण जल क्षेत्र सिकुड़ने से विदेशी पक्षियों ने भी इस ...
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