लखनऊ, अप्रैल 27 -- लखनऊ, विधि संवाददाता। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की है। न्यायालय ने कहा कि पूर्व आयोग का कार्यकाल 2024 में ही समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद नई नियुक्तियों को लेकर प्रतिवादियों की स्पष्ट निष्क्रियता साफ दिखाई दे रही है। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 मई की तिथि नियत करते हुए, राज्य सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट जवाब देने का आदेश दिया है।यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने शम्स तबरेज की जनहित याचिका पर पारित किया है। याचिका में आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की शीघ्र नियुक्ति के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया ...